रेत नहीं होने से सरकारी और प्राईवेट काम हुए बंद, 35 हजार रुपए में भी नहीं मिल रही एक डंपर रेत
 रेत नहीं होने से सरकारी और प्राईवेट काम हुए बंद, 35 हजार रुपए में भी नहीं मिल रही एक डंपर रेत

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ब्यूरो चीफ मुलताई, जिला बैतूल 


मुलताई। मुलताई सहित पूरे क्षेत्र में पिछले एक पखवाड़े से रेत का भारी टोटा बना हुआ है, हालात यह है कि रेत लाने वाली सभी गाडिय़ा खड़ी हुई है और नगर में रेत कहीं नहीं है। हालात यह है कि 35 हजार रुपए में भी एक डंपर रेत नहीं मिल रही है। रेत नहीं होने से सरकारी एवं प्राईवेट सभी काम बंद हो गए हैं। 


रेत लाने वाले डंपर मालिकों का कहना है कि रेत की खदाने बंद हो गई हैं, ऐसे में उन्हें रेत नहीं मिल पा रही है। जिसके कारण सभी गाडिय़ां खड़ी है, हालात यह है कि गाडिय़ों की किश्त वह कैसे देंगे उन्हें यह भी समझ नहीं आ रहा है। अगले दस दिनों तक रेत की यह कमी यूही बनी रहने की बात डंपर मालिकों द्वारा कही जा रही है। 


रेत के दामों ने पहले ही लोगों के मकान का सपना चकनाचूर कर दिया था, मुलताई में 50 रुपए फीट के हिसाब से रेत मिल रही थी, लेकिन पिछले 15 दिनों से 70 रुपए फीट में भी रेत उपलब्ध नहीं है। हालात यह है कि सभी रेत खदानों के बंद होने की बात कही जा रही है, जिसके कारण मुलताई में रेत आना पूरी तरह से बंद हो गई है। डंपर मालिक हेमंत साबले, संजय पंवार सहित अन्य लोगों ने बताया कि सभी खदाने बंद होने से सभी गाडिय़ां खड़ी हुई है। 


एक बार जाकर गाडिय़ा खाली आ चुकी हैै, ऐसे में अब जब तक दोबारा खदाने नहीं शुरू होगी, तब तक गाडिय़ा भेजकर भी कोई मतलब नहीं है। हेमंत साबले ने बताया कि गाडिय़ों के खड़े रहने से उनके सामने गाडिय़ों की किश्त भरने और ड्रायवर, कंडेक्टर को तन्खवाह देने का संकट पैदा हो गया है। गाडियों की महीने की किश्त 50 से 80 हजार रुपए के बीच आती है। रेत नहीं मिलने से सभी गाडिय़ों के चक्के थमे हुए हैं। 


वहीं रेत नहीं आने से क्षेत्र के सरकारी एवं प्राईवेट काम पूरी तरह से बंद हो गए है। बताया जा रहा है कि मुलताई क्षेत्र में लगभग सौ से ज्यादा मकानों का काम शुरू है, इसमें से अधिकांश मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए जा रहे हैं, लेकिन रेत महंगी होने और नहीं मिलने से सभी मकानों के काम पूरी तरह से बंद हो गए हैं। वहीं यह बात भी सामने आ रही है कि रायल्टी बढ़ाई जाने से डंपर मालिकों द्वारा रेत नहीं लाई जा रही है और विरोध स्वरूप इनके द्वारा अपने डंपर खड़े किए गए हैं। 


मुलताई में यहां-यहां से आती है रेत 


मुलताई क्षेत्र में रेत विभिन्न स्थनों से आती हैे, मुलताई में भौंरा, लोधीखेड़ा, कनान, दमुआ तरफ से रेत आती है। बताया जा रहा है कि पहले खदानों पर रायल्टी बढ़ा दी गई थी, जिसका भी विरोध डंपर मालिकों द्वारा किया जा रहा था, लेकिन अब खदानों को बंद कर दिया गया है। खदाने बंद होने से रेत नहीं लाई जा रही है। खदाने कब खुलेगी, इस बारे में किसी को कोई जानकारी नहंी है। बताया जा रहा है कि उक्त मामला बड़े स्तर का है और उपर से ही इसको लेकर निर्णय लिया जाएगा। 


खदान से मिलेगी स्टाक की रेत 


बताया जा रहा है कि एनजीटी के नियमों के चलते खदाने बंद है, वहीं खदानों में जो स्टाक की रेत है, वह ही खदाने शुरू  होने पर डंपरों से क्षत्र में लाई जाएगी। नियमों के चलते खदानों का बंद होना बताया जा रहा है, लेकिन खदाने बंद होने से मकान बना रहे लोगों को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वहीं सरकारी कामों पर भी ब्रेक लग गया है। नगर में जितनी सड़के बनाई जा रही थी, उन सभी का काम खदान बंद होने से और रेत नहीं आने से पूरी तरह से बंद है, सड़क नहीं बनने से लोगों को परेशानी हो रही है। लोगों ने बताया कि बारिश में  सड़क नहीं बनने से दलदल बनी हुई है और काम शुरू होने के बाद रेत नहीं होने से काम बंद पड़ा हुआ है। 


काम बंद होने से मजदूर भी हुए परेशान 


इधर काम बंद होने से मकान बनाने वाले मजदूर भी परेशान हो रहे हैं, रेत नहीं होने से काम बंद हो गए और मजदूर घर बैठ गए हैं। बताया जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों सहित मुलताई से सैकड़ों की संख्या में मजदूर काम करने आते हैं और इसी के भरोसे इनकी रोजी-रोटी चलती है और गुजर-बसर होती है। मजदूरों ने बताया कि जब काम ही बंद है तो ठेकेदार उन्हें काम पर नहीं बुला रहा है, जिससे उनके सामने बड़ा संकट पैदा हो गया है। 


इनका कहना 



मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है, मैं इस मामले में खनिज विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर बताता हूं।



         सीएल चनाप एसडीएम मुलताई। 


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